Thursday, September 18, 2008

लता/८०: स्वर उत्सव: पाँचवी कड़ी: दुनिया हमारे प्यार से यूं ही जवां रहे


सन १९४९ आते आते लता जी एक प्रतिष्ठित गायिका बन चुकी थी, और हरेक संगीतकार लताजी को अपने गाने गवाना चाहते थे।
इसी
साल एक फिल्म आई लाहोर जिसमें मुख्य भूमिकायें नरगिस और करण दीवान की थी। यह फिल्म बँटवारे के विषय पर आधारित थी, और फिल्म के संगीतकार थे श्याम सुन्दर। श्याम सुन्दर इससे पहले लताजी को एक्ट्रेस फिल्म के गाने हेल्लो हेल्लो जेन्टलमेन... में शमशाद बेगम के साथ गवा चुके थे पर वो बात नहीं बनी।
श्याम सुन्दर भी इससे पहले कई फिल्मों में संगीत दे चुके थे मसलन गाँव की गोरी, भाईजान, एक रोज, चार दिन, देव कन्या आदि... और उस जमाने के सभी गायक कलाकार जैसे नूरजहां, सुरैया, अमीरबाई, मोहम्म्द रफी आदि उनके निर्देशन में गा चुके थे।
लाहौर फिल्म के गीतों के लिये एक बार फिर उन्होने लताजी को चुना। इस फिल्म में बहुत सारे और एक से एक लाजवाब गीत थे। पर दो गीत ऐसे थे जो सबकी जुबां पर चढ़ गये पहला तो था बहारें फिर भी आयेंगी मगर हम कहां होंगे और दूसरा था दुनिया हमारे प्यार की यूं ही जवां रहे, मैं भी जहाँ पर रहूं मेरा साजन जहां रहे.. ।आज की पोस्ट में अगर बहारें फिर भी आयेंगी वाला गाना लगाया जाता तो अच्छा होता पर यह गीत सबका सुना और जाना पहचाना है सो श्रोता बिरादरी ने दूसरा गीत यानि दुनिया हमारे प्यार की आपको सुनाने का निश्चय किया।
इस गीत में लता जा साथ दिया था इस फिल्म के नायक करण दीवान ने। करण दीवान उस जमाने के जाने माने गायक-अभिनेता थे।
खैर यह स्वर उत्सव लताजी का है तो एक बार फिर लताजी की गायकी पर आते हैं। आज हम जिस गीत को आपको चुनाना चाहते हैं वह एक हल्का फुल्का प्रेमगीत है परन्तु लताजी ने एक बार पिर अपनी आवाज से इस गीत में प्राण डाल दिये, और गीत को अमर बना दिया। करण दीवान भी बेहद मधुर गायक थे। इस गीत में ना केवल लताजी, वरन करण दीवान ने भी अपनी मधुर आवाज से इस गीत को अमर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
आपने इस गीत को अब तक नहीं सुना है तो हमारा विश्वास है आप इसे एक बार सुनने आपका मन नहीं भरेगा।
आईये गीत सुनते हैं।



दुनिया हमारे प्यार की यूँ ही जवाँ रहे
मैं भी वहीँ रहूँ मेरा साजन जहाँ रहे
दो दिन की ज़िंदगी है इसे यूँ गुज़ार दे
उजड़ी हुई ये प्यार की राहें सँवार दे
हम तुम यहाँ रहे ना रहे इस का ग़म नहीं
लेकिन हमारे प्यार का बाकी निशाँ रहे
मैं भी वहीं रहूँ मेरा साजन जहाँ रहे
दुनिया हमारे प्यार की यूँही जवाँ रहे
मैं भी वही रहूँ मेरा साजन जहाँ रहे
दुनिया में छोड़ जायेंगे हम वो निशानियाँ
बन जायेंगी जो प्यार की मीठी कहानियाँ
दुनिया हमारे बाद हमें यूँ करेगी याद
दो प्यार करने वाले हैं पर एक जाँ रहे
मैं भी वहीं रहूँ मेरा साजन जहाँ रहे
दुनिया हमारे प्यार की यूँही जवाँ रहे
मैं भी वहीं रहूँ मेरा साजन जहाँ रहे
दुनिया हमारे प्यार की


फोटो हमारा फोटोस से साभार

3 टिप्पणियाँ:

Harshad Jangla said...

यह गीत रेडियो सीलोन पर काफी बार सुना हुआ है | मधुर और कर्णप्रिय गीत है|
चुनंदे गीत के लिए और खास करके हररोज़ दीदी की एक नई तस्वीर प्रगट करने के लिए आपकी टीम के हम सब खूब आभारी है|
यह खुबसूरत यात्रा यूँही जारी रहे यह शुभ कामना |

-हर्षद जांगला
एटलांटा , युएसए

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

लतादीदी का स्वर बिलकुल नन्ही कीशोरी सा है इस गीत मेँ !
मैँने पहले सुना नहीँ था -
बहुत आनँद आया इसे सुनकर आप सभीका बहुत आभार ..सँगीत के सुहाने सफर मेँ साथ चलते हुए ,और भी सुँदर मकाम आयेँगेँ इसका पूरा भरोसा है ..शुभ कामना !
- लावण्या

मीत said...

क्या बात है. अरसे बाद सुना ये मधुर गीत....और लता की ये आवाज़ ....... बहुत सुंदर प्रस्तुति.

 
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