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Saturday, September 6, 2008

आइये ! दो दिनों तक लगातार सुनें वह अमृत-आशा स्वर

जिस आवाज़ ने पिछले छह दशक से हम संगीत-प्रेमियों के दिलों में हर लम्हा धड़कने वाले सुर छेड़े हैं,जो सरगम की पटरानी है,जिसकी आवाज़ ने जिस शब्द को छुआ वह एक सुरीला स्मारक बन गया ऐसी सुरकुमारी आशा भोंसले सोमवार 8 सितम्बर को जीवन की पिचहत्तरवीं पायदान पर क़दम रखने जा रहीं है. संजोग कुछ ऐसा बन रहा है कि कल रविवार(7 सितम्बर)को श्रोता-बिरादरी की आमद का दिन है और
सोमवार(8 सितम्बर) को आशा जन्मोत्सव . इसी को ध्यान में रखते हुए दोनो दिन श्रोता-बिरादरी के सफ़े पर पर महकेंगे आशा भोंसले की अनमोल रचनाएँ.

समय वही श्रोता-बिरादरी टाइम यानी लगभग सुबह नौ बजे के आसपास.
हमें पूरा विश्वास है कि आप अपने व्यस्तक्रम में से इस अवसर पर श्रोता-बिरादरी के क़रीब होंगे क्योंकि यक़ीनन आशा भोंसले आपके भी दिलों पर राज करतीं हैं न.
आइये मिल कर सुनें वह अमृत-आशा स्वर.

Saturday, August 30, 2008

मख़मली आवाज़ में वेदना की सर्वप्रिय गाथा का अनमोल गीत

वेदना,पीड़ा,दु:ख़ या ग़म  ज़िन्दगी को एक नया मेयार देते है.
भारतीय कथा-कथन के सर्वकालिक हिट पात्र को अभिव्यक्त करता एक अनमोल गीत
श्रोता-बिरादरी की रविवासरीय जाजम पर आ रहा है. बरसात,पर्व,राष्ट्रप्रेम और शास्त्रीय संगीत की दावतों में तो श्रोता-बिरादरी ने आपको आमंत्रित किया ही है आइये एक दर्द भरा गीत भी सुन लिया जाए. देश के दस सर्वकालिक अभिनेताओं,गीतकारों,संगीतकारों और गायकों की सूची बने तो निश्चित रूप से यह चौकड़ी शुमार करनी ही पड़ेगी जिसका तानाबाना कल श्रोता बिरादरी के गीत के इर्द गिर्द घूमा है.

आज संगीत में शोर का जो आलम है उसमें शब्द और स्वर कराहते सुनाई देते है जबकि कल इस गीत को सुनियेगा तो आप महसूस करेंगे कि हमने इन बीते पचास बरसों में जो जो भी गँवाया है उसमें बेशक़ीमती है संगीत का वह मासूम अहसास जिससे ज़िन्दगी को नये आयाम और नज़रिये मिलते रहे हैं.

बहरहाल चलते चलते आगामी सप्ताह में प्रारंभ हो रहे महापर्व गणेश उत्सव और रमज़ान की अग्रिम शुभकामनाएँ आप सभी श्रोता-बिरादरों के प्रति.

कल रविवार 31 अगस्त श्रोता-बिरादरी टाइम पर मुलाक़ात होती है.आ रहे हैं न....

Saturday, August 9, 2008

अखण्ड किशोर स्वर में डूबी श्रोता-बिरादरी की रविवासरीय पेशकश

          योगायोग ही कहिये कि पिछले रविवार और सोमवार लगातार दो दिन तक आपसे सुरीली मुलाक़ात होती रही. प्रतिक्रियाएँ भी मिलीं,ई-मेल्स,समस और आपके फ़ोन कॉल्स भी. मन भर आता है आपके प्रतिसाद से और इरादा पक्का बनता है कि संगीत के सुनहरे दौर की ये बातें आपके कोमल मन को छू रही हैं.
          बात करते करते फ़िर आ गया रविवार या कहें श्रोता-बिरादरीवार.सुबह के नौ बजेंगे और १० अगस्त को फ़िर एक बार मिल बैठेंगे हम एक ऐसे संगीतकार की रचना लेकर जो मूलत: एक ख्यात संगीतकार जोड़ी का सहयोगी रहा. बेताज बादशाह रहा तालवाद्यों का लेकिन जब भी ख़ुद बतौर म्युज़िक डायरेक्टर काम किया तो बता दिया वह किस पाये का कलाकार है.गीत के क्या कहने , सुनते ही लगे कि ये तो मेरे मन की बात है और गायकी ...माशाअल्लाह देश की इस सुर महारानी का स्वर तो जैसे  भगवान ने कुछ ऐसा गढ़ा है कि उसकी उम्र ही नहीं बढ़ती ...सुनते सुनते एक पीढ़ी बूढ़ी हो गई लेकिन वह है एक अखण्ड कैशोर्य  स्वर.....समझ तो गए हैं आप ...बिलकुल ठीक ...भल आपका अंदाज़ ग़लत कैसे हो सकता है  ....बस आपकी इसी अदा पर तो क़ुरबान है हम तीनों यानी यूनुस,सागर और संजय का दिल.आप से ही है श्रोता-बिरादरी के सुरीलेपन की महफ़िल रोशन.आदाब.

Saturday, August 2, 2008

लगातार दो दिनों तक बने रहियेगा...श्रोता – बिरादरी के साथ....

समय पलक झपकते ही बीत जाता है. कहते हैं समय के पँख होते हैं;
पाँव नहीं. पिछले हफ़्ते श्रोता-बिरादरी को दो बार मौक़ा मिला आपसे बतियाने का.
31 जुलाई को रफ़ी साहब की बरसी पर जारी गीत पर मिले प्रतिसाद के
लिये आभार . आइये एक बार फ़िर एक नये गीत को याद करें;सुनें;गुनें
और हाँ ये गीत है ही ऐसा कि साथ में गुनगुनाएँ भी.
मल्हार के रंग में भीगी ये बंदिश आपके मन के आनंद को रोशन करेगी
इसका पूरा यक़ीन है हमें.

रविवार की सुबह नौ बजे के अनक़रीब श्रोता-बिरादरी की सुरीली बिछात आपकी मुंतज़िर रहती है. इस गीत को सुनने के बाद हमें फिर ये मानना पड़ता है कि फ़िल्म संगीत के बेजोड़ सृजनधर्मियों ने जो काम किया है वह कितना लाजवाब है. चित्रपट विधा में समय की जो सीमा है उसमें रहते हुए ,शास्त्रीय संगीत का मान बढ़ाते हुए और सबसे महत्वपूर्ण ...कविता की गरिमा पर क़ायम रहते हुई कैसे कैसे नायाब
कलेवर रचे हैं हमारे गुणी गीतकारों,गायकों,और संगीतकारों ने.गीत आपका सुना हुआ और सराहा हुआ है लेकिन इस मौसम की रंगत में इज़ाफ़ा करता हुआ ज़रा ज़्यादा ही सुरीला सुनाई देता है.

सुनियेगा ज़रूर....कल सुबह यानी 3 अगस्त को ये ख़ास गीत.

और हाँ आपको एक ख़ुशखबर देना तो भूल ही गये....4 अगस्त को फ़िर मिल रहे हैं रमाकु रशोकि का जन्मदिन मनाना है न हमें – आपको।
तो लगातार दो दिन तक श्रोता-बिरादरी के साथ बने रहियेगा.....ये आप ही की तो महफ़िल है जनाब.

Saturday, July 12, 2008

रविवारीय सुबह में कल आ रही है आपकी “मन-मोहन” श्रोता बिरादरी

यह सुरीली सुबह का तीसरा रविवार है.जिस तरह से आपने श्रोता-बिरादरी


को सराहा है, स्नेह दिया है ; हमारी ज़िम्मेदारी बढ़ चली है.कोशिश है कि

संगीत के महासागर में से कुछ अनमोल मोती चुन कर आप तक पहुँचाएँ.

एक गुज़ारिश को फ़िर दोहराना चाहते हैं;आप जब भी श्रोता-बिरादरी पर

जारी किये गए गीत को सुनें या उसके बारे में पढ़ें तो अपनी टिप्पणी में

इस बात का ज़िक्र ज़रूर करें कि आपको इस रचना में नया क्या सुनाई दिया.

या जब पहले भी कभी आपने इस गीत को सुना है कौन सी ख़ास बात आपको

मोहती रही है.



चलिये तो फ़िर तैयार हो जाइये सुनने के लिये एक अनमोल रचना.

कम्पोज़िशन और कविता के लिहाज़ से ये एक न भुला सकने वाली

कृति है. संगीतकार का कारनामा ऐसा कि धुन तो आप भूल ही नहीं

सकते.गायकी ऐसी कि लगेगा सारे आलम का दर्द यहाँ सिमट आया

है.और शायरी के क्या कहने...कितने सरल शब्दों मे सिचुएशन को

अभिव्यक्त कर रही है. इस रचना को इसी रविवार सुनने

की ख़ास वजह भी है ......आपके कानोंपर इस संगीतकार

पर बरसों-बरस राज जो किया है..



बस कल सुबह ही की तो बात है...मिल बैठ कर सुन लेते हैं

यह गीत श्रोता-बिरादरी की बिछात पर....आइयेगा.

Saturday, July 5, 2008

कल फ़िर हाज़िर हो रही है आपकी अपनी सुरीली श्रोता-बिरादरी.

वादे के मुताबिक रविवार की सुबह
कविता,संगीत और गायकी के लिहाज़ से
एक बेहतरीन रचना लेकर आ रही है आपकी
अपनी श्रोता-बिरादरी.

एक ऐसे संगीतकार का कारनामा जिसके नाम से रोशन है
फ़िल्म संगीत में मेलडी का सुदीर्घ कारवाँ.

इस गीत को लिखा है फ़िल्म संगीत में हिन्दी की
विशिष्टता का रंग घोलने वाले क़लम के जादूगर ने.

गाया है अपनी बलन के दो यशस्वी गायकों ने जिनकी
आवाज़ में यह रचना एक प्यार भरे बादल की मानिंद
बरसी है श्रोताओं के दिल के नील-गगन में.

तो मिलते हैं रविवार 6 जुलाई को सुबह तक़रीबन
9 बजे श्रोता-बिरादरी की सुरीली बिछात पर.
आ रहे हैं न.....

Saturday, June 28, 2008

रविवार दर रविवार सजने जा रही है श्रोता-बिरादरी-पहला सुर :२९ जून

संभवत: यह पहली बार है कि तीन संगीत-प्रेमी शख़्स किसी एक ब्लॉग पर काम करेंगे। यूनुस ख़ान, सागर नाहर और संजय पटेल किसी एक गीत का इंतेख़ाब कर उस पर एक संयुक्त ब्लॉग लिखेंगे..हफ़्ते में सिर्फ़ एक दिन।
रविवारीय सुबह को सुरीला बनाने आ गई है श्रोता बिरादरी.

अभी तो शुरूआत भर है...बाद में इरादा है कि हर महीने बाक़ायदा किसी थीम को लेकर ब्लॉग-बिरादरी से बतियाएँगे..सुनेंगे...सुनाएंगे.
इरादा इतना भर है कि हम चित्रपट के सुरीलेपन को साझा तो करें ही; आपकी समझ और जानकारी का एहतराम भी करें...सो अच्छा लगा, साधुवाद,शुक्रिया,धन्यवाद,बहुत सुंदर,क्या बात है ..से ऊपर उठकर अपनी सार्थक टिप्पणियों को लिखें.सुने हुए गीत में अपनी अनुभूति को अभिव्यक्त करें...
पूरे एक हफ़्ते वक़्त होगा आपके पास ....तसल्ली से गीत,संगीत गायन या आर्केस्ट्राइज़ेशन पर आप अपनी बात कह सकते हैं।
ये आपकी अपनी बिरादरी है...
ऐसी बिछात पर जिस पर महान गायकों,वादकों,संगीतकारों के कारनामों के सम्मान सुदीर्घ सिलसिला होगा।

आ रहे हैं न.....श्रोता बिरादरी की रसभीनी बिछात पर.. !!

 
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