Wednesday, August 3, 2011

आज पण्डित किसोरदास खण्डवावासी का जन्मदिन है !

किशोर कुमार के बारे में जितनी बात की जाए कम है.वे हँसी और ख़ुशी को विस्तार देने वाले ऐसे सजग कलाकार हैं जिसने ख़ुद अपनी अदाकारी और गायकी का शास्त्र गढ़ा. वे ज़िन्दादिली का पर्याय थे लेकिन कुछ मार्मिक अवसरों पर अपने अभिनय और गायन से रुला देने का हुनर भी रखते थे.

गायक,अभिनेता, निर्माता,संगीतकार के अलावा एक कवि भी था जो किशोर दा में छुपा हुआ था और कुछ कम ही प्रकट हो पाया. कहते हैं दूर गगन की छाँव में फ़िल्म के नग़मे उन्होंने ही लिखे. ज़िन्दादिली उनमें कूट कूट कर भरी थी. एक बार फ़िल्म स्तंभकार और लेखक जयप्रकाश चौकसे ने किशोर दा से पूछा कि फ़िल्म उद्योग उन्हें कंजूस मानता है,क्यों ? किशोर दा ठहाका लगाते हुए बोले क्या कोई कंजूस चार शादियाँ करता है. किशोर कुमार ने चौकसे जी को वह कक्ष दिखाया जिस
में वीडियो कैसेट्स भरीं पड़ीं थी और ये सारी फ़िल्में हॉरर

थीं जो उन्होंने ख़ास तौर पर विदेश से मंगवाईं थीं.कमरे में एक पलंग पर लेट कर किशोर दा इन फ़िल्मों का रसपान करते.ये तब की बात है जब ओरिजनल वीडियो कैसेट्स बहुत महंगे थे.किशोर दा ने चौकसेजी से उन सैकड़ों कैसेट्स को दिखाते हुए पूछा क्या कंजूस आदमी इस तरह ख़र्च करता है. यह चौंकाने वाला सत्य है कि मनमौजी किशोरकुमार को डरावनीं फ़िल्में पसंद थीं.वे कहते थे कि इन फ़िल्मों में भावना का विवेचन बहुत अच्छे ढंग से होता है और तर्कहीनता के कारण डर में से हास्य रस उपजता है. इस तरह की विरोधाभासी बात किशोरकुमार की बलन का कलाकार ही सोच सकता है. हॉरर और हास्य की जुगलबंदी के लिये स्मशान में अलख जगाने वाले कलेजा लगता है.

आइये किशोर कुमार को उनके जन्मदिन पर याद करते हुए उन्हीं की रची इस पान महिमा का आनंद लीजिये और महसूस कीजिये कि कितना विलक्षण कवि इस हरफ़नमौला फ़नक़ार में हर वक़्त मौजूद रहता था.
पान महिमा:

पान सो पदारथ सब जहान को सुधारत
गायन को बढ़ावत जामें चूना चौकसाई है
सुपारिन के साथ साथ मसाल मिले भाँत भाँत
जामें कत्थे की रत्तीभर थोड़ी सी ललाई है
बैठे हैं सभा माँहि बात करें भाँत भाँत
थूकन जात बार बार जाने का बढ़ाई है

कहें कवि ’किसोरदास’ चतुरन की चतुराई साथ
पान में तमाखू किसी मुरख ने चलाई है

-पं.किसोरदास ’खण्डवावासी’
पता:बम्बई बाजार रोड,गाँजा गोदाम के साथ
सामने लायब्रेरी के निकल वाला बिजली खंबा जिसपे लिखा है
डोंगरे का बालामृत

ग़ौर कीजिये कि किस कसावट के साथ इस छंद के अनुशासन निभाया गया है. ऐसा लगता है जैसे किसी धुरंधर कविराज ने इसे रचा है. हास्य का पुट देने वाले के लिये उन्होंने इस कविराज का पता भी किशोरी छटा में ही दिया है.

एक बार किशोर कुमार के गायक-पुत्र अमितकुमार ने बताया था कि
बाबा (किशोर दा) पंचम दा (स्व.राहुलदेव बर्मन) के साथ एक गीत की रिहर्सल कर रहे थे. पंचम दा किसी पंक्ति को गाते और हारमोनियम पर बजा कर सुनाते तो किशोर दा उस संगीत को सुनकर कहते ’केबीएच-केबीएच’ . एक दो बार कह चुकने के बाद पंचम दा से रहा नहीं गया सो पूछ बैठे दादा ये केबीएच क्या है ? किशोर दा बोले देख पंचम तेरी धुन इतनी बढिया है कि हर बार " क्या बात है " कहने को जी चाहता है तो ये थोड़ा लम्बा हो जाता है तो मैंने तेरे लिये ये एब्रीवेशन बना लिया है केबीए़च......देखें तो ये बहुत साधारण बात है..लेकिन एक कलाकार की स्फ़ूर्तता (स्पाँटिनिटि) क्या ख़ूब बयान करती है.

किशोर दा इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज में अपने सहपाठियों को अर्थशास्त्र में माल्थस का सिध्दांत भी पूरा का पूरा गाकर सुनाते थे.

किशोरकुमार का जन्मदिन इस बात का पुर्नस्मरण भी करवाता है कि हमने जीते जी कलाकारों की क़द्र नहीं की. आज बमुश्किल किशोर दा की लाइव रेकॉर्डिंग्स उपलब्ध हैं. हमारे तकनीकी रूप से समृध्द समय में आज भी दस्तावेज़ीकरण के लिये चिंता नज़र नहीं आती. किशोरदा के इंटरव्यू बमुश्किल मिलते हैं. ऐसी कोई चीज़ें उपलब्ध ही नहीं हो पातीं जिनसे इस बेमिसाल कलाकार की स्मृतियों को ज़िन्दा रखा जा सके. हम किशोरप्रेमियों को उनके गीतों और फ़िल्मों का ही सहारा है जिसके ज़रिये हम उन्हें हम तक़रीबन हर दिन याद कर लेते हैं.

आइये आज श्रोता-बिरादरी की जाजम पर आपको सुनवाते हैं एक दुर्लभ गीत.
सुनिये और दिन भर किशोर दा को याद कीजिये...




गीत: माइकल है तो साइकिल है
गायक: किशोर कुमार एवं आशा भोंसले
फ़िल्म: बेवकूफ़
संगीतकार: एस. डी . बर्मन
गीतकार:
कलाकार: किशोर कुमार एवं माला सिन्हा
वर्ष: 1960


Video Link : http://www.youtube.com/watch?v=_Q4au-j3pts


आज की इस पोस्ट का विवरण म.प्र.संस्कृति संचालनालय द्वारा प्रकाशित स्मारिका "किशोर विमर्श" और नईदुनिया के प्रकाशन "फ़िल्म-संस्कृति" से साभार.
  • इस गीत को हमारे अनुरोध पर अर्चनाजी ने खोज कर हमें इसका लिंक खोज दिया, अर्चनाजी का भी बहुत बहुत धन्यवाद।

6 टिप्पणियाँ:

sudhir-rafi said...

wah wah bhot khoob aapne kishore da ke kuch unchue pahluon pe jo prakash dala hai wah kabile tarif hai...Kishore da humesha hasne gane wale aur mauz masti karne wale insaan ke roop me jaane jaate the magar unke dil ke bheetar jo dard chupa hota tha wo geeton me bayan hote the.....maine ye bhi suna hai jab bhi wo recording pe jaate the to wo unke saath unka ek manas putra hua karta tha aur sabko kehte the beta inhe pranam karo aur bhi bahot sare mazakiya harkate karte the recording ke samya.sach me aisa mahan gayak bahot virle hi paida hote hai.

Archana said...

KBH KBH KBH!!! Bahut hi badiya post hai. Kavita padhke mazaa aa gaya. Ab khaike paan banaras wale sunte hai.

And thank you so much! It was such a pleasure looking up for that song.

Atul Malviya said...

Sir, Kishorda ke ek aur roop se parichay karane k leya dhanvyad.
regards.

Anonymous said...

Suresh Yadav (on facebook)
kishor da ke baare me suna he ki unhone kabhi sangit ki upacharik shikcha nahi li.................he na ashcharyajanak

Yogendra said...

क्यो इतनी जल्दी चले जाते हो.....और फ़िर लौट के भी नहीं आते.....

ZEAL said...

किशोर दा के बारे में दुर्लभ जानकारी मिली। इतना बेहतरीन गीत सुनवाने के लिए आभार।

 
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